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लखनऊ में फिर हत्याकांड: कब जागेगा प्रशासन? 📌 महिला को अगवा कर मलिहाबाद में हत्या, आलमबाग थाना प्रभारी समेत कई पुलिसकर्मी निलंबित

इस जघन्य वारदात के बाद प्रशासन हरकत में आया, लेकिन सवाल ये है कि हमेशा घटना के बाद ही कार्रवाई क्यों होती है?

लखनऊ में फिर हत्याकांड: कब जागेगा प्रशासन?

📌 महिला को अगवा कर मलिहाबाद में हत्या, आलमबाग थाना प्रभारी समेत कई पुलिसकर्मी निलंबित

लखनऊ: राजधानी में महिला सुरक्षा के दावों की एक बार फिर पोल खुल गई है। आलमबाग क्षेत्र से एक महिला का अपहरण कर बेरहमी से हत्या कर दी गई, उसका शव मलिहाबाद में आम के बाग में बरामद हुआ। इस जघन्य वारदात के बाद प्रशासन हरकत में आया, लेकिन सवाल ये है कि हमेशा घटना के बाद ही कार्रवाई क्यों होती है?

🔴 पुलिस की लापरवाही बनी हत्या की वजह?

घटना के बाद आलमबाग थाने के निरीक्षक समेत कई पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया। वहीं, शहरभर में ऑटो चालकों के खिलाफ विशेष अभियान भी शुरू कर दिया गया। लेकिन क्या सिर्फ अभियान चलाने से अपराध रुक जाएगा?

यह पहली बार नहीं है जब ऑटो चालकों की आड़ में अपराधियों ने अपनी घिनौनी हरकत को अंजाम दिया हो। इससे पहले भी महिलाओं और छात्राओं पर कई बार हमले हो चुके हैं।

🔹 2 फरवरी 2015 – एलएलबी की छात्रा गौरी की शहीद पथ के पास हत्या।
🔹 17 जुलाई 2014 – मोहनलालगंज में युवती की दरिंदगी के बाद हत्या।
🔹 15 फरवरी 2016 – जानकीपुरम में 12वीं की छात्रा का रेप और हत्या, लेकिन बैग और साइकिल आज तक बरामद नहीं हुई।
🔹 10 जुलाई 2023 – बंथरा में इंटरव्यू देने गई छात्रा की ऑटो में हत्या।
🔹 19 मार्च 2025 – मलिहाबाद में 32 वर्षीय महिला की दुष्कर्म के बाद गला दबाकर हत्या।

हर बार एक नई घटना, वही पुरानी लापरवाही और फिर वही पुलिस की दिखावटी कार्रवाई

🚨 क्या कर रही है पुलिस?

हर विभाग के अपने नियम और कानून होते हैं, लेकिन जब तक कोई बड़ा हादसा न हो जाए, तब तक किसी को कानून की याद नहीं आती। जब कोई वारदात हो जाती है तो प्रशासन नींद से जागता है, दिखावटी सख्ती दिखाता है और कुछ दिनों बाद सब पहले जैसा हो जाता है।

दरअसल, विभागों में बैठे अधिकारी आरामतलब और मलाई खाने के इतने आदी हो चुके हैं कि अगर कोई पत्रकार इनकी लापरवाही को उजागर कर दे, तो या तो उसे दबाने की कोशिश होती है या फिर खबर लिखने वाले की नौकरी खतरे में पड़ जाती है। ऊपर बैठे अफसर भी आंखें मूंद लेते हैं, क्योंकि वे भी इसी सिस्टम का हिस्सा हैं।

⚠️ ऑटो चालकों पर लगाम क्यों नहीं?

लखनऊ में ऑटो रिक्शा चालक महिलाओं के लिए असुरक्षा का दूसरा नाम बनते जा रहे हैं। कई घटनाओं में देखा गया है कि ऑटो में बैठने के बाद महिलाओं के लिए लौटना मुश्किल हो जाता है। लेकिन सवाल यह है कि चौराहों पर तैनात पुलिसकर्मी क्यों नहीं सतर्क रहते?

🔸 ओवरलोडिंग करने वाले वाहनों को रोकने में पुलिस तुरंत एक्टिव हो जाती है, लेकिन
🔸 ऑटो में बैठी महिला गायब हो जाती है और पुलिस को भनक तक नहीं लगती!

आखिर ये कैसी सुरक्षा व्यवस्था है? क्या पुलिस केवल चालान काटने और रिश्वत लेने तक ही सीमित रह गई है?

❗ अब सरकार के पास दो ही रास्ते हैं—

1️⃣ महिलाओं की सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाएं और दिखावटी कार्रवाई से आगे बढ़ें।
2️⃣ या फिर इंतजार करें कि अगली खबर में फिर किसी बहन-बेटी की लाश मिले और फिर वही FIR, वही निलंबन, और वही दिखावा हो।

लखनऊ में महिला सुरक्षा के नाम पर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत बेहद डरावनी है। यह वक्त सिर्फ अभियानों का नहीं, व्यवस्था में असली सुधार लाने का है। अगर अब भी पुलिस और प्रशासन नहीं जागा, तो कौन जाने अगला शिकार कौन बनेगा?

📌 (रिपोर्ट: एलिक सिंह, संपादक, वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज)
📞 संपर्क: 8217554083
📌 जिला प्रभारी (BJAC), भारतीय पत्रकार अधिकार परिषद्

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